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व्यथा… अतिथि शिक्षकों की।

अतिथि शिक्षक नियुक्ति आदेश में इस वर्ष भी शोषण की संभावना…… सैकड़ों के बाहर होने का खतरा…..

जनजातीय कार्य विभाग की भर्ती प्रकिया का अभी भी है इंतजार…….

रिपोर्टर : दिलीप कुमरावत Mob.No.9179977597

मनावर। (जिला धार) बहुप्रतीक्षित अतिथि शिक्षक भर्ती आदेश लोक-शिक्षण संचालनालय भोपाल के द्वारा 26 जून को जारी कर दिया गया है। इस आदेश के अनुसार भर्ती होने में भी बच्चों को कम से कम एक महीने की पढ़ाई का नुक्सान उठाना पड़ेगा।


बताया जाता है कि लगभग 17 वर्षों बाद पहली बार, जून के महीने में आदेश जारी हुआ। अब तक जुलाई – अगस्त में आदेश जारी होने की परंपरा चली आ रही थी। जिससे बच्चों की पढ़ाई कम से कम दो महीने पीछे हो जाती थी। फिलहाल एजुकेशन विभाग के लिए ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ हुई है, जबकि अधिकांशतः जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत क्षेत्र में अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं। माह जुलाई का पहला सप्ताह समाप्त होने को है मगर अभी तक जनजातीय कार्य विभाग का कोई आदेश नहीं आया और न ही नवीन सत्र के लिए कोई दिशा निर्देश जारी किए गए ताकि पूर्व कार्यरत अतिथि शिक्षकों को रखकर रिक्त पदों की आपूर्ति कर बच्चो को अध्यापन कार्य बगैर व्यवधान के करवाया जा सके। शासन प्रशासन की गैर जिम्मेदाराना रवैये से अतिथि शिक्षकों के साथ स्कूलों के प्राचार्य, शिक्षा अधिकारी भी परेशान है। अतिथि शिक्षकों द्वारा बारह महीने सेवा पर रखे जाने की भी मांग की जा रही है।

26 जून के आदेश में अतिथि शिक्षकों के कर्तव्यों को तो स्पष्ट किया गया मगर उनके हित में स्थाई रोजगार को लेकर कोई भी दिशा निर्देश जारी नहीं किए गए, जिससे कि निकट भविष्य में अतिथि शिक्षकों को नियमित रोजगार पाने की थोड़ी सी भी उम्मीद जाग सके।

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इस भर्ती आदेश की हर कंडिकाओं में भारी शोषण की बू आ रही है। जिससे मध्यप्रदेश के दशकों के अनुभवी अतिथि शिक्षकों का भारी शोषण होना नहीं रुकेगा। जिससे इनके परिवारों में सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ना लाजमी है।

अतिथि शिक्षकों को नए आदेश के तहत कितनी भी इमरजेंसी आ जाने के बाद भी किसी भी प्रकार के अवकाश की पात्रता नहीं होती है।

शिक्षकों की भारी कमी के बावजूद अनुभवी अतिथि शिक्षकों का नियमितीकरण किया जाना चाहिए मगर इस संबंध में सरकार गंभीर नहीं है। अतिथि शिक्षकों से समस्त स्कूली कार्य नियमित शिक्षक के समान लिया जाता है तो नियमित शिक्षकों की भारी कमी के चलते दशकों के अनुभवी अतिथि शिक्षकों को समान काम का समान वेतन और शिक्षक जैसा पदनाम देने में सरकार को समस्या क्या है ? यह बड़ा सवाल है।


26 जून को जारी आदेशानुसार अतिथि शिक्षकों को स्कूल में प्रति कार्यदिवस उपस्थिति शिक्षक एप पर सुबह-शाम दो बार दर्ज करने की बाध्यता होगी जबकि अतिथि शिक्षक का मानदेय कालखंड के हिसाब से भुगतान किए जाने का नियम भी नियुक्ति आदेश में स्पष्ट होता है। जिस समय अतिथि शिक्षक का कालखंड आता है, उस समय उसको शाला में उपस्थित रहकर पढ़ाना अतिथि शिक्षक भर्ती नियम कहता है। बाकी समय संस्था में बने रहने की बाध्यता नहीं होती है।

आनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के लिए एंड्रॉयड स्मार्टफोन की जरूरत होती है,जबकि बहुत ही कम मानदेय पाकर पूरे समय काम करने वाले बहुतायत अतिथि शिक्षकों के पास कीपैड मोबाइल ही हुआ करता है, कम मानदेय पर एंड्रॉयड मोब खरीदना संभव नहीं। अधिकांशतः अतिथि शिक्षकों के निज निवास और स्कूल की दूरी ज्यादा और इंटीरियर में होने के कारण आवागमन के साधनों के अभाव के चलते भी हमेशा समय पर स्कूल पहुंच पाना या समय तक शाला में ठहर पाना संभव नहीं हो पाता है। ऐसी स्थिति में आनलाइन उपस्थिति दर्ज कर पाने से अतिथि शिक्षक कई दिन चूक जाएंगे और मानदेय से वंचित रह जाएंगे।


शासन के मापदंड अनुसार किसी स्कूल के दो में से किसी एक अतिथि शिक्षक को बाहर होना पड़ा तो कम अनुभव के आधार पर नहीं बल्कि स्कोरकार्ड में कम अंक के आधार पर बाहर होना पड़ेगा। इस तरह अनुभव को किसी भी प्रकार का तवज्जो नहीं दिया गया है,जो अधिकतर अनुभवी अतिथि शिक्षकों के खिलाफ हैं।जबकि किसी भी पद की बढ़ोत्तरी या अपनी जगह बनाए रखने के विकल्प के लिए अनुभव ही एक ऐसा आधार है, जिसमें कोई पक्षपात की गुंजाइश नहीं होती।

अतिथि शिक्षकों के लिए नियमित रोजगार देने के लिए पूर्व में की गई घोषणा पर विचार नहीं करके रोजगार से वंचित करने वाला शोषण भरा आदेश जारी कर अधिकांश अतिथि शिक्षकों का भविष्य खतरे में नजर आ रहा है। एक बार फिर नाराज अतिथि शिक्षक सड़कों पर उतरने मजबूर होंगे। ऐसी प्रबल संभावना है।

इन दिनों अतिथि शिक्षकों में भारी आक्रोश व्याप्त है, बताया जाता है कि नाराज अतिथि शिक्षक बहुत ही जल्द सड़कों पर उतरकर नियमितीकरण के खिलाफ ऐसी भर्ती प्रक्रिया का पुरजोर विरोध करने बाध्य होंगे।

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